Make your own free website on Tripod.com

bnd.jpg

Near Bindki

Home | History | National Poet | Place of Intrest | Election | Theatre | Bindki Map | Other Information

Bawani Imali

This monument is the symbol of sacrifices offered by freedom fighters . On 28th April, 1858, fifty two freedom fighters were hanged on an "Imali" tree by the british army . The "Imali" tree still exists, people believe that the growth of tree has stopped after the massacre. This place is very near to town Khajuha in Bindki Subdivision of the district .

Bhitaura

This is block headquarter situated at the bank of holy river Ganga . This is the place where renowned saint Bhrigu worshipped for a long time . Here, flow of river Ganga is towards north direction, which is very important from the religious point of view .

Hathgam

This is also block headquarter and birth place of great freedom fighter Late Shri Ganesh Shankar Vidyarthi & renowned Urdu poet Shri Iqbal Verma . It is said, this was populated by Saint Parashar .

Renh

A very old village situated on the bank of river Yamuna . Two decades before a very old idol of Lord Vishnu, made up of precious alloy, was found in this village . Now that idol is in a temple in village Kirtikheda on Bindki Lalauli road .

Shivrajpur

This village is situated at the bank of river Ganga near Bindki, which is a sub-division . In this village, there is a very old temple of Lord Krishna, which is known as "Mirabai Ka Mandir" (temple of Mirabai) . It is said that idol of Lord Krishna was founded by Mirabai, a renowned devotee of Lord Krishna and a member of royal family of Mewar state .

Tenduli

A village situated on Chaudagara-Bindki road . It is believed that victims of snake/dog biting, persons suffering from parapsychological problems get relief from the temple of Baba Jhamdas in this village

Khajuha

Khajuha is a historical town in Fatehpur District. It is located to the north of Fatehpur, about 51 km from Kanpur. Bindki lies 8 km west of it.

Khajuha witnessed one of the fiercest battles ever fought in India. At the battle, which took place on 5th January 1658, Aurangzeb decisively won over his brother, Shah Shuja.

Karbigwan Railway Station and C A Kanpur Airport are the nearest railway station and airport.

 

 खजुहा

खजुहा गांव मुगल रोड पर स्थित है। यह गांव काफी प्राचीन है। इसका वर्णन प्राचीन हिन्दू धर्मग्रन्थ ब्रह्मा पुराण में भी हुआ है, जो कि 5000 वर्ष पुराना था। 5 जनवरी 1659 ई. में मुगल शासक औरगंजेब का अपने भाई शाहशुजा के साथ भीषण युद्ध हुआ था। औरंगजेब ने शाहशुजा को इस जगह के समीप ही मारा था। अपनी जीत की खुशी में उन्होंने यहां एक विशाल और खूबसूरत उद्यान और सराय का निर्माण करवाया था। इस उद्यान को बादशाही बाग के नाम से जाना जाता है। इसके अतिरिक्त इस सराय में 130 कमरें है।आज की स्थिति में यह अत्यन्त जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है
 
बिन्दकी से करीब पांच किमी दूर पश्चिम दिशा में स्थित ऐतिहासिक खजुहा नगरी कभी हिन्दुओं की पवित्र धार्मिक स्थली रही है। पुराणों व किवदंती के अनुसार भगवान शिव ने यहां भी तपस्या की थी। इसलिए यह नगरी शिव जी के उपासकों की रही है। एक सैकड़ा के करीब शिव के मंदिर इस बात की प्रामाणिकता दे रहे हैं।

लोग कहते हैं कि यहां खजूर के पेड़ बहुत थे इसलिए खजुहा पड़ा। दूसरे यह कि यहां खजुहा नामक एक दैत्य रहता था जिससे लोग परेशान थे। किवदंती के अनुसार भगवान शिव ने यहां तपस्या की तो वह दैत्य भाग गया था। इसलिए यहां के लोग शिव के उपासक हो गये। यहां बड़ी बाजार व नगर के पश्चिम दिशा में पक्के तालाब के किनारे बने विशालकाय शिव मंदिर है। शिवरात्रि में सभी शिवालयों में पूजा होती है। बेलपत्र, दूध, घी व दही से शिव जी का रुद्राभिषेक होता है।

औरंगजेब ने बनवाया था पड़ाव

मुगल शासक औरंगजेब ने हिन्दू धर्म की भावनाओं को आघात करने के लिए कलकत्ता व आगरा के बीच इसी नगरी में अपना पड़ाव स्थापित कर पवेलियन और दो बड़े गेट , सेना व घोड़ों को रोकने के किला की तरह बनवाया था। पंथेश्वरी देवी कमेटी के 70 वर्षीय दिनेश चंद्र दीक्षित बताते हैं कि ब्रह्मपुराण में वर्णित है कि यहां भगवान शिव ने तपस्या की थी, इसीलिए यहां शिव के उपासक व मंदिर बहुतायत में हैं। पुरातत्व विभाग मंदिरों को भी संरक्षित करे

रेंह

यमुना नदी के तट पर स्थित रेंह बहुत ही प्राचीन गांव है। यह गांव फतेहपुर शहर के दक्षिण-पश्चिम से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। माना जाता है कि इस जगह से 800 ई. पूर्व के पुरातात्त्विक महत्व से जुड़े लेख प्राप्त हुए थे। इसके अलावा मौर्य काल, कुषाण काल और गुप्त काल के कई सिक्के और मूर्तियां प्राप्त हुई थी। दो दशक पूर्व भवगान विष्णु की प्राचीन मूर्ति इस गांव से प्राप्त हुई थी। वर्तमान समय में यह मूर्ति कीर्तिखेडा गांव के मंदिर में स्‍थापित है।

बिन्दकी
फतेहपुर से 30 किलोमीटर की दूरी पर बिन्दकी क़स्बा है। यह एक प्राचीन शहर है। इस शहर का नाम यहां के शासक राजा वेणुकी के नाम पर रखा गया था। इस जगह की पृष्ठभूमि काफी धार्मिक और ऐतिहासिक है। बिन्दकी सेनानी जोधा सिंह अटैया और कई अन्य स्वतंत्रता सेनानियों तथा प्रसिद्ध हिन्दी कवि राष्ट्र कवि सोहन लाल द्विवेदी की मातृभूमि है।
शिवराजपुर
गंगा नदी के तट पर शिवराजपुर गांव स्थित है। इस गांव में भगवान कृष्ण का प्राचीन मंदिर स्थित है। जिसे मीराबाई के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि मंदिर स्थित भगवान कृष्ण की मूर्ति की स्थापना मीराबाई ने की थी। वह भगवान कृष्ण की बहुत बड़ी भक्त थी और मेवाड़ राज्य के शाही परिवार की सदस्य थी।
तेंदुली
यह गांव चौदहग्राम-बिन्दकी मार्ग पर स्थित है। इस गांव में बाबा झमदास का मंदिर स्थित है। माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को सांप या कुत्ता काट लेता है तो वह व्यक्ति मनो-विकार की समस्या से पीड़ित होता है। इस मंदिर में आकर इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। यंहा एक मन्दिर है , जिसे गुप्त कालीन बताया जाता हैआजकल यह अत्यन्त जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है
बावनी इमली
यह स्मारक स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का प्रतीक है। 28 अप्रैल 1858 में ब्रिटिश सेना द्वारा बावन स्वतंत्रता सेनानियों को एक इमली के पेड़ पर फांसी दी गई थी। जिस जगह पर यह इमली का पेड़ है, लोगो का मानना है कि इस घटना के बाद इस वृक्ष की विकास रूक गया है। यह जगह खजुहा शहर के निकट स्थित है। वैसे मूल पेड़ आज सूख चुका है ,लेकिन एक नई पेड़ की शाखा पनप चुकी है ,जो आज उसका अस्तित्व बनाये हुए है
भिटौरा

उत्तरवाहिनी पवित्र गंगा नदी के तट पर स्थित भिटौरा विकास खंड मुख्यालय के रूप में स्थित है है। यह वह स्थान है जहां संत भृगु ने काफी लम्बे समय तक तपस्या की थी। इसी कारण इस जगह को भृगु ठौर के नाम से भी जाता है। यहां गंगा नदी उत्तर दिशा से प्रवाहित हो रही है इसी कारन यंहा का पौराणिक महत्व के साथ -साथ धार्मिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है

हथगाम

यह स्थान महान स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय श्री गणेश शंकर विद्यार्थी और प्रसिद्ध उर्दू कवि श्री इकबाल वर्मा की जन्मभूमि है।

You are Visitor number :