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जहँ उत्तर मे गँगा बहती, 
दक्षिण मे यमुना प्यारी।
ऐसे रम्य स्थान बसी है, 
बिन्दकी, की फुलवारी।।
पुष्प जहाँ नहीँ कभी मुरझाते,
पक्षी भी देश पे गाने गाते।
श्वान भी करवाल उठाकर,
न्याय पक्ष मे लड़ने जाते।।
अंग्रेजो ने फाँसी चढ़ाकर,
कितनोँ के घर किया है गम।
पर इस नगर की वसुधा पे,
नही हुये वीर कभी कम।।
यहीँ जन्मे थे सोहन लाल, 
कहता जिन्हेँ देश भगवान।
ऐसे गौरवपूर्ण नगर को,
कुलदीप का कोटि प्रणाम।।

सन् सत्तावन मे जोधा सिँह,
और इक्यावन उनके साथी।
चढ़े फाँसी के फन्दे पर योँ,
ज्यो कोई मतवाले हाँथी।।
अँग्रेजोँ को शीस देकर के,
भारत माँ की किस्मत देख।
सेवा करने गये वीर बहु,
भारत-पाक बनी जो रेख।।
जन्मे यहीँ है मेजर खान,
ऋणी है उनका हर इंसान।
ऐसे गौरवपूर्ण नगर को,
करे कुलदीप कोटि प्रणाम।।

इस नगर के बिना हमारा,
भारत नहि हो सकता महान।
बहुत लोग बस विदेशोँ मे,
बढ़ा रहे हैँ इसका मान।।
इक से मेरी बात हुयी थी,
जो बसे मलेशिया देश मे।
इक भैय्या आँकलैँण्ड मे रहते,
जो प्रौद्योगिकी की रेस मे।।
यही नगर है उन वीरोँ का,
जो सदा समर्पित करते जान।
ऐसे गौरवपूर्ण नगर को,
करे कुलदीप ह्रदय से प्रणाम।।

जय भारत!!!
जय बिन्दकी!!! 

(कुलदीप कुमार शाहू)

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